भारत की राजभाषायें

भारतीय संविधान में विभिन्न संस्थानों से व्यवहार करने के लिए अलग– अलग भाषाएं हैं यानि संघ की भाषा, क्षेत्रीय भाषाएं, न्यायिक भाषा और विधि एवं विशेष निर्देशों की भाषा। यद्यपि, इस संविधान के शुरु होने से लेकर आने वाले पंद्रह वर्ष की अवधि तक, अंग्रेजी भाषा का प्रयोग संघ के सभी राजकीय उद्देश्यों के लिए किया जाना जारी रहेगा जैसा कि इसका प्रयोग पहले किया जा रहा था ।

भारतीय संविधान में विभिन्न संस्थानों से व्यवहार करने के लिए अलग– अलग भाषाएं हैं यानि संघ की भाषा, क्षेत्रीय भाषाएं, न्यायिक भाषा और विधि एवं विशेष निर्देशों की भाषा। संविधान में, इसके प्रावधानों का उल्लेख इस प्रकार किया गया है–

संघ की राजभाषा

(1) संघ की राजभाषा देवनागरी लिपि में हिन्दी होगी। संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए अंकों का स्वरूप भारतीय अंकों का अंतरराष्ट्रीय स्वरूप होगा।

(2) यद्यपि, इस संविधान के शुरु होने से लेकर आने वाले पंद्रह वर्ष की अवधि तक, अंग्रेजी भाषा का प्रयोग संघ के सभी राजकीय उद्देश्यों के लिए किया जाना जारी रहेगा जैसा कि इसका प्रयोग पहले किया जा रहा था। राष्ट्रपति, कथित अवधि के दौरान, संघ के किसी भी राजकीय उद्देश्य के लिए अंग्रेजी भाषा के साथ हिन्दी भाषा के उपयोग और भारतीय अंकों के अंतरराष्ट्रीय रूप के साथ अंकों के देवनागरी रूप के उपयोग का आदेश जारी कर सकते हैं।

(3) इस अनुच्छेद में दिए जाने के बाद भी, कानून द्वारा संसद पंद्रह वर्षों की अवधि के बाद अंग्रेजी भाषा के उपयोग या अंकों के देवनागरी स्वरुप का उपयोग का कानून में निर्धारण कर सकती है।

भारत की क्षेत्रीय भाषाएं 

आधिकारिक भाषा या राज्यों की भाषाएं

अनुच्छेद 346 और 347 के प्रावधानों के अधीन, राज्य का विधान मंडल, विधि द्वारा राज्य में प्रयोग की जाने वाली किसी भी एक या अधिक भाषाओं या हिन्दी भाषा को राज्य में सभी या किसी भी राजकीय उद्देश्यों में उपयोग के लिए अपना सकता है। बशर्ते, जब तक कि राज्य का विधान मंडल कानून नहीं बना लेता, तब तक राज्य में ऐसे राजकीय उद्देश्यों के लिए अंग्रेजी भाषा का उपयोग उसी प्रकार जारी रहेगा जैसा कि इस संविधान के शुरु होने से पहले किया जा रहा था।

राज्यों के बीच या राज्य एवं संघ के बीच संचार की राजभाषा

कुछ समय के लिए संघ में राजकीय उद्देश्यों के लिए प्रयोग की जाने वाली राजभाषा ही राज्यों के बीच या संघ एवं राज्य के बीच संचार की राजभाषा होगी। बशर्ते अगर दो या दो से अधिक राज्य आपस में संचार के लिए हिन्दी को राजभाषा के रूप में इस्तेमाल के लिए सहमत हों, तो ऐसे संचार के लिए उस भाषा का इस्तेमाल किया जा सकता है।

किसी राज्य की आबादी के एक वर्ग द्वारा बोली जाने वाली भाषा से संबंधित विशेष प्रावधान

इस बाबत मांग को निमित्त बनाते हुए, राष्ट्रपति, अगर वे इस बात से संतुष्ट होते हैं कि किसी राज्य की आबादी का बड़ा हिस्सा उनके द्वारा बोली जाने वाली भाषा को राज्य की मान्यता मिलने की इच्छा रखती है, तो राष्ट्रपित के निर्देश से ऐसी भाषा को पूरे राज्य भर में या उसके किसी हिस्से में राजकीय भाषा के तौर पर मान्यता मिलेगी।

न्यायपालिका और विधि में इस्तेमाल की जाने वाली भाषाएं

सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालय, अधिनियमों और विधेयकों आदि के लिए इस्तेमाल की जाने वाली भाषा

(1) इस हिस्से के पूर्वगामी उपबंधों में दिए गए किसी भी बात के होते हुए, जब तक कि संसद विधि द्वारा प्रदान न करे–

क) सुप्रीम कोर्ट और प्रत्येक उच्च न्यायालय की सभी कार्यवाहियों में

(2) आधिकारिक पाठों में

(3) राज्य के राज्यपाल, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति के साथ, राज्य के किसी भी राजकीय उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किए जाने के लिए हिन्दी भाषा या किसी भी अन्य भाषा के उपयोग को प्राधिकृत कर सकते हैं।

संसद ने सुप्रीम कोर्ट की भाषा के तौर पर हिन्दी के इस्तेमाल करने के संबंध में कोई भी कानून नहीं बनाया है और इसलिए सुप्रीम कोर्ट की एकमात्र भाषा अंग्रेजी है। अतीत में कुछ घटनाएं हुईं हैं जिसमें सुप्रीम कोर्ट में हिन्दी में दायर की गई याचिका को यह कह कर खारिज कर दिया गया था कि अदालत की भाषा अंग्रेजी है और हिन्दी की अनुमति देना असंवैधानिक होगा।

विशेष निर्देश

संघ या किसी राज्य के किसी भी अधिकारी या प्राधिकारी के खिलाफ शिकायतों के निवारण के लिए अभ्यावेदन में प्रयोग की जाने वाली भाषा संघ या राज्य में प्रयोग की जाने वाली कोई भी भाषा हो सकती है, या जैसा भी मामला हो।

भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी

भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए राष्ट्रपति द्वारा विशेष अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी। यह विशेष अधिकारी का काम होगा कि वह भाषाई अल्पसंख्यकों से संबंधित सुरक्षा उपायों के सभी मामलों की जांच करे और उनकी रिपोर्ट राष्ट्रपति को दे।

हिन्दी भाषा के विकास के लिए निर्देश

हिन्दी भाषा के प्रसार को बढ़ावा देना, उसका विकास करना ताकि भारत की मिली– जुली संस्कृति के सभी तत्वों में हिन्दी अभिव्यक्ति के माध्यम के तौर पर काम कर सके और हिन्दुस्तानी एवं आठवीं अनुसूची में निर्दिष्ट भारत की अन्य भाषाओं में इस्तेमाल किए जाने वाली इसकी प्रतिभा, रूपों, शैली और अभिव्यक्ति में हस्क्षेप किए बिना इसे आत्मसात कर सुरक्षित रखना, संघ का कर्तव्य होगा।

वर्तमान में संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाएं हैं– असमिया, बंगाली, गुजराती, हिन्दी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, सिन्ध, तमिल, तेलुगु, उर्दू, बोडो, संथाली, मैथली और डोगरी।

हालांकि, भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में और अधिक भाषाओं को शामिल करने की मांग पर विचार करने के लिए कोई समय सीमा तय नहीं की जा सकती है।

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